राम नाम बिनु बिरथे जगी जनमा सब्जेक्टिव क्वेश्चन कक्षा- 10
राम नाम बिनु बिरथे जगी जनमा का सब्जेक्टिव क्वेश्चन आंसर
इस लेख में Ram naam binu birthe jagi janma subjective question - राम नाम बिनु बिरथे जगी जनमा सब्जेक्टिव क्वेश्चन दिया गया है।
अगर आप कक्षा - 10 में है और बिहार बोर्ड परीक्षा में शामिल होने वाले हैं तो इस लेख को ध्यानपूर्वक अवश्य पढ़ें।
क्योंकि इस लेख में कक्षा दसवीं के हिंदी के काव्यखण्ड पाठ - 2 Ram naam binu birthe jagi janma ka subjective question - राम नाम बिनु बिरथे जगी जनमा का सब्जेक्टिव क्वेश्चन दिया गया है। जो आपके बोर्ड परीक्षा में पूछे जा सकते है तो अपने तैयारी को बेहतर बनाने के लिए नीचे दिए गए सभी प्रश्नों को अवश्य पढ़ें।
Ram naam binu birthe jagi janma subjective question
1. कवि किसके बिना जगत में यह जन्म व्यर्थ मानता है?
उत्तर: कवि गुरुनानक देव राम नाम के बिना इस जगत मे यह जन्म व्यर्थ मानता है।
2. वाणि कब विष के समान हो जाती है?
उत्तर: रामनाम के बिना मनुष्य की वाणी विष के समान हो जाती है।
3. नाम-किर्तन के आगे कबि किन कर्मो की व्यर्थता सिद्ध करता है?
उत्तर: गुरुनानक कवि नाम - कीर्तन के आगे पुस्तक अध्ययन, व्याकरण मनन, संध्या गायत्री कर्म, ढण्ड मंडल ग्रहण करमा, धोती पहनना, तीर्थाटन, जटा धारणा, पगड़ी धारण आदि कर्मों की व्यर्थता सिद्ध करता है।
4. प्रथम पद के आधार पर बताएँ की कवि ने अपने युग मे धर्म - साधना के कैसे-कैसे रूप देखे थे?
उत्तर: प्रथम पद के अंतर्गत कति धर्म साधना के दो रूप देखे थे गुरु के उपदेशों का अनुकरण करना तथा हरी के नामों का कीर्तन करना।
5. हरिरस से कवि का अभिप्राथ क्या है?
उत्तर: हरिरस से कवि का अभिप्राय हरिभक्ति है।
6. कवि की दृष्टि मे ब्रहम का निवास कहां होता है?
उत्तर: कवि की दृष्टि मे ब्रह्म का निवास स्थान प्राणी का शहीर अथवा आत्मा है।
7. गुरु की कृपा से किस युक्ति की पहचान हो पाती है।
उत्तर: गुरु की कृपा से भक्ति एवं संसार रुपी भवसागर से पर पाने की युक्ति की पहचान हो पाती है।
(क) राम नाम बिनु अरुझी मरै।
उत्तर: प्रस्तुत पंक्ति हमारी हिंदी पाठ्यपुस्तिका गोधूलि, भाग-2 के काव्यखण्ड के पाठ "राम नाम बीनू बिरथे जगी जनमा से लिया गया है। जिसके कवि गुरुनानक जी है।
इषि ने इस कविता के माध्यम से राम-नाम की सीमा का वर्णन करते हुए लिखा है कि संसार सागर से पार पाने का एकमात्र उपाय रामनाम हो याद करना व जप करना है। उसके बिना व्यक्ति इस संसार के मायाजाल में उलझकर मर जाता है।
(ख) कंचन माटी जानें ।
उत्तर: प्रस्तुत पंक्ति हमारी हिंदी पाठ्यपुस्तिका गोधूलि, भाग-2 के काव्यखण्ड के पाठ "राम नाम बीनू बिरथे जगी जनमा से लिया गया है। जिसके कवि गुरुनानक जी है।
इस पंक्ति के माध्यम से कवि कहना चाहता है कि जिस व्यक्ति को दुखी नहीं कर पाता, जिसे सुख, स्नेह, भय आदि प्रभावित नही कर पाते और वो दुसरो के राम को बाटी समझता है वही, सच्चा व्यक्ति और भक्त होता है। उसका जीवन सार्थक है।
(ग) हरष सोक ते रहे नियारो, नाहि मान अपमाना ।
उत्तर: प्रस्तुत पंक्ति हमारी हिंदी पाठ्यपुस्तिका गोधूली, भाग-2 के काव्य के चाह "राम नाम बिनु विरथे जगि जनाम" से लिया गया है। जिसके कवि गुनानक जी है।
इस पंकित के माध्यम से कवि गुरु के उपदेश की महिमा के प्रभाव का महत्व बतलाते हुए कहता है कि जिस पर गुरु के उपदेश का प्रभाव पड़ता है यह सुख-दुख, हर्ष-शोक इत्यादि सांसारिक चीजों से निरपेक्ष हो जाता है।
(घ) नानक लिन भयों गोविंद सो, ज्यो पानी संग पानी।
उत्तर: प्रस्तुत पंक्ति हमारी हिंदी पाठ्यपुस्लिका गोभूलि, भाग-2 काव्यखण्ड के पाठ "राम नाम बिनु बिरथे जगी जनमा" से लिया गया है। जिसके कवि गुरुनानक जी है।
इस पंडित के माध्य से कवि गुरुनानक कहते है कि भगवान गोविंद की ऐसी भक्ति मे लीन होना चाहता हूँ जैसे नदियों का पानी सागर मे मिल जाता है और वैसा ही बन जाता है।
9. आधुनिक जीवन मे उपासना के प्रचलित रूपो को देखते हुए नानक के इन पदों की क्या प्रासंगिकता है? अपने शब्दो मे विचार करे।
उत्तर: वर्तमान समय मे उपासना के जो रूप प्रसिद्ध है वे सभी कर्मकांड से संबद्ध है। आज की आपाधापी वाले जीवन मे कर्मकांड आधारित भक्ति कठिन है। ऐसी स्थिति मे गुरुनानक कबीर की तरह सहज उपासना के मार्ग को प्रशस्त करते हुए कहते है कि हरि के नाम का कीर्तन सबके के लिए आसान है। इसमें आडंबर भी नहीं है। इससे न समय सीमा है, न खर्च ।
अतः मेरे अनुसार भी 'गुरुनानक' की यह भक्ति पद्धति समीचीन लगती है।

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