Jantrantra ka janm subjective question answer जनतंत्र का जन्म
Jantantra ka janm subjective question answer जनतंत्र का जन्म सब्जेक्टिव क्वेश्चन
इस लेख में Jantantra ka janm subjective question - जनतंत्र का जन्म सब्जेक्टिव क्वेश्चन दिया गया है।
अगर आप कक्षा - 10 ( Class 10th ) में है और बिहार बोर्ड परीक्षा में शामिल होने वाले हैं तो इस लेख को ध्यानपूर्वक अवश्य पढ़ें।
क्योंकि इस लेख में कक्षा दसवीं हिंदी गोधूली भाग 2 के काव्यखण्ड पाठ - 2 Jantantra ka janm kavita ka subjective question - जनतंत्र का जन्म कविता का सब्जेक्टिव क्वेश्चन दिया गया है। जो आपके बोर्ड परीक्षा में पूछे जा सकते है तो अपने तैयारी को बेहतर बनाने के लिए नीचे दिए गए सभी प्रश्नों को अवश्य पढ़ें।
Bihar board class 10th hindi subjective question 2023
उत्तर: कवि की दृष्टि मे पराधीनता का अंत और स्वाधीनता की प्राप्ति कवि की दृष्टि मे समय के रथ का घर्घर-नाद है। या,
कवि ने सदियों से राजतंत्र से शासित जनता की जागृति को उजागर करते हुए समय के चक्र की ओर लोगों का ध्यान आकृष्ट किया है। राजसिंहासन पर प्रजा आरूढ़ होने जा रही है। समय की पुकार ही क्रांति की शंखनाद के रूप में रथ का घर्घर-नाद है।
उत्तर: कविता के आरंभ में कवि भारतीय जनता का वर्णन अबोध, मूक, मिट्टी की मुरते आदि के रूप मे भारतीय जनता का वर्णन करता है।
3. कवि के अनुसार किन लोगों की दृष्टि मे जनता फूल या दुधमुही बच्ची की तरह है और क्यों ? कवि क्या कहकर उनका प्रतिवाद करता है?
उत्तर: कवि के अनुसार राजसता के सिंहासन पर बैठे लोगों की दृष्टि में जनता दुधमुंही बच्ची की तरह है। आज तक वें सोचते आ रहे थे की जनता पर राजा का अधिकार होता है। वह जब चाहे उससे अपना राज सिंहासन सता लेले और जब चाहे जनता के दुधमुही बच्ची की तरह कुछ देकर फुसला ले। इनका प्रतिवाद कवि ने जनता को भगवान कहकर किया है जो खेतों या खलिहानों में मिल सठता है।
4. कवि जनता के स्वप्न का किस तरह चित्र खीचता है? उत्तर: कवि ने जनता के स्वपन का चित्र अंधकार या सीना चीरने वाले अजय के रूप मे खीचता है।
उत्तर: विराट जनतंत्र का स्वरूप 33 करोड़ जनता के हित का है। कवि 33 करोड़ जनता के सर पर मुकुट धरने की बात करता है।
उत्तर: कवि की दृष्टि मे आज के देवता जनता जनार्दन है जो सड़कों पर, खेत खलिहानों मे मिट्टी तोड़ते और काम करते मिल जायेंगे।
उत्तर: "जनतंत्र का जन्म कविता का मूलभाव अंग्रेजी शासन के अंत के बाद सच्चे लोकतंत्र की स्थापना है।
उत्तर :- प्रस्तुत पंक्तियां हमारी हिन्दी पाठ्यपुस्तिका गोधूलि, भाग- 2 के काव्यखण्ड के पाठ " जनतंत्र का जन्म" से लिया गया है। जिनके कवि रामधारी सिंह दिनकर जी है।
प्रस्तुत पंक्ति में कवि ने जनतंत्र की स्थापना की बात कही है। साथ ही, जनता की शक्ति का बोध कराया है। कवि रामधारी सिंह दिनकर जी ने ओजस्वी भाव में जनता की महत्ता का बोध कराते हुए उसकी सहनशीलता, धैर्य की बात बड़े ही सहज रूप में कहा है। साथ ही, भारत की जनता को अपना अधिकार प्राप्त करने, जनतंत्र स्थापित करने, राजसिंहासन पर आरूढ़ होने की प्रेरणा का भाव कवि ने जागृत करने का सफल प्रयास किया है। इस पद्यांश में जनता की शक्ति का व्यापक चित्रण किया गया है आजादी का भाव जगाता है।

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