swadeshi subjective question - सब्जेक्टिव class 10th hindi
swadeshi subjective question - सब्जेक्टिव क्वेश्चन class 10th hindi
इस लेख में Swadeshi ka subjective question - स्वदेशी का सब्जेक्टिव क्वेश्चन दिया गया है।
अगर आप कक्षा - 10 ( Class 10th ) में है और बिहार बोर्ड परीक्षा में शामिल होने वाले हैं तो इस लेख को ध्यानपूर्वक अवश्य पढ़ें।
क्योंकि इस लेख में कक्षा दसवीं हिंदी गोधूली भाग 2 के काव्यखण्ड पाठ - 2 Swadeshi ka subjective question - स्वदेशी का सब्जेक्टिव क्वेश्चन दिया गया है। जो आपके बोर्ड परीक्षा में पूछे जा सकते है तो अपने तैयारी को बेहतर बनाने के लिए नीचे दिए गए सभी प्रश्नों को अवश्य पढ़ें।
Bihar board class 10th hindi subjective question 2023
उत्तर: 'स्वदेशी' कविता हे माध्यम से कवि बद्रीनारायण चौधरी 'प्रेमधन' ने विदेशी वस्तुओं के वहिष्कार और स्वदेशी वस्तु एवं संस्कृति का महिमा मंडन किया है।
अत: स्वदेशी शीर्षक बिल्कुल ही सार्थक है।
2. कवि को भारत मे भारतीयता क्यों नहीं दिखाई पड़ती ?
उत्तर: भारतीय लोगों द्वारा अंग्रेजी संस्कृति अपनाये जाने के कारण कवि को भारत मे भारतीयता दिखाई नही पड़ती।
उत्तर: कवि समाज के प्रबुद्ध वर्ग की आलोचना करता है क्योंकि वे विदेशी विद्या पढ़कर विदेशी संस्कृति मे रम गया है। उनकी बुद्धि भी विदेशी हो गई है।
उत्तर: कवि प्रेमधन भारत के नगर, बाज़ार और अर्थव्यवस्था पर टिप्पणी करते हुए कहता है है कि सभी पर विदेशी वस्तुएँ हावी हो गई है। स्वदेशी वस्तु कही नही दिख रही है जिसके कारण भारतीय अर्थव्यवस्था चौपट हो गई।
उत्तर: नेताओं के संबंध मे कवि की राय है कि सब भारतीय ढीली-ढाली धोती इन नेताओं से संभल नहीं पा रही, तो फिर इनसे देश की बागडोर कैसे संभलेगी।
उत्तर: भारतीय वर्ण व्यवस्था को मानने वाले लोगो को कवि ने ' डफाली' कहा है क्योकि वे गुलामी पसंद करते है। अंग्रेजो की चाटुकारी करना उन्हे अच्छा लगता है और स्वदेशी वस्तुओं की झूठी प्रशंसा करते हैं।
उत्तर: उपर्युक्त पंक्ति हमारी हिंदी पाठ्यपुस्तिका गोधूलि, भाग-2 के काव्यखण्ड के कविवा 'स्वदेशी' से लिया गया है। जिसके लेखक का नाम प्रेमधन है।
इस कविता के माध्यम से कवि ने "यह बताया है कि स्वदेशी वस्तुओं का प्रचलन हमारे देश मे अब समाप्त होता जा रहा है। विदेशी विद्या, वेश-भूषा, चाल-चलन, खान-पान सब पर विदेशी संस्कृति हावी हो गई। इसके कारण भारतीय इतने बदल गए है कि कोई उन्हें पहचान भी नहीं सकता है कि यह भारतीय है।
उत्तर: प्रस्तुत पंक्ति हमारी हिन्दी पाठ्यपुस्तिका गोधूलि, भाग-2 के काव्यखण्ड के कविता 'स्वदेशी' से लिया गया है। जिससे लेखक प्रेमधन जी है।
प्रेमधन अपने देश के लोगों का झुकाव विदेशी वस्तु व संकृति की तरफ देखकर व्यथित हो उठे है। वह कहते है - " अंग्रेजी रूचि, गृह सकल, वस्तु देश विपरित " अर्थात अंग्रेजी वस्तु मे रुचि बढ़ जाने से हमारे घर के सकल बस्तु विदेशी दिखाई पड़ती है जो भारत के विपरीत है।

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